एकता परिषद के रजत जयंती समारोह (22-24 जनवरी 2015) के अवसर पर भारत के 20 राज्यों के लगभग 2000 प्रतिनिधियों के द्वारा विमर्श किया गया कि देश की मौजूदा परिस्थितियों में वंचितों को न्याय, शांति और सम्मान दिलाने के लिए एकजुट होने की आवश्यकता है ।  चर्चा के दौरान विभिन्न वक्ताओं के द्वारा पुरजोर तरीके से इस बात को भी रखा गया कि देश में जनसंगठनों को एक समन्वित दृष्टिकोण, समन्वित कार्यधारा और समन्वित आंदोलन की ओर बढ़ना होगा ।  
1.    विभिन्न आंदोलनों की विचारधारा और कार्यधारा का नया आयाम संविधान केन्द्रित रणनीति होनी चाहिये ताकि दृष्टिकोणों को न्याय और समता के आधार पर मजबूत किया जायेगा ।  
2.    न्याय, शांति और अधिकार केन्द्रित नये आंदोलनों के लिए सभी संगठनों का समन्वित आंदोलना का संचालन किया जायेगा ।
3.    सभी आंदोलनों के केन्द्र बिंदू में समाज के अंतिम व्यक्ति के अधिकार के लिए सबसे पहले अभियान शुरू किया जायेगा ।
4.    सामाजिक आंदोलनों में नये विचार और नयी उर्जा के संचार के लिए युवाओं को प्रमुखता से स्थान दिया जायेगा ।
5.    देश में महिला अधिकारों के लिए और विशेष तौर पर महिला किसान तथा महिला श्रमिकों के लिए निर्णायक अभियान प्रारंभ किया जायेगा ।
6.    विभिन्न आंदोलनों के लिए संघर्ष, संवाद और रचना को विचारधारा और कार्यधारा का प्रमुख तत्व माना जायेगा ।
7.    देश में अहिंसात्मक अर्थव्यवस्था के पुनर्निर्माण हेतु ग्राम केन्द्रित स्वावलंबी व्यवस्था को स्थापित किया जायेगा ।
8.    जल, जंगल और जमीन में वंचितों के अधिकारों के लिए भूमि और नैसर्गिक संपदा को बचाने हेतु पर्यावरण संरक्षण का कार्य किया जायेगा ।
9.    जिसकी लड़ाई उसकी अगुवाई के सिद्वांत पर वंचित समाज से नये नेतृत्व का निर्माण किया  जायेगा ।
10.    भूमि और कृषि को बचाने के लिए किसानों और संगठित तथा असंगठित मजदूरों के अधिकारों के लिए संयुक्त आंदोलन किया जायेगा ।
11.    अहिंसा की विचारधारा और कार्यधारा को स्थापित करने के लिए प्रत्यक्ष अहिंसात्मक आंदोलन किये जायेगें ।
सभी संगठनों के द्वारा संयुक्त रूप से जारी इस घोषणा-पत्र के आधार पर एकता परिषद से यह अपेक्षा की जाती है कि जनसंगठनों के इस गठबंधन को और अधिक व्यापक तथा मजबूत बनायें ।  


भावी आंदोलनों के लिए प्रस्तावित रणनीतियाॅं
1.    स्थानीय नेतृत्व का विकास
-    देश के 665 जिलों में से सभी जिलों में 500 युवाओं को नये नेतृत्व के लिए प्रशिक्षण दिया जायेगा ।
-    प्रशिक्षण प्राप्त इन लगभग तीन लाख युवाओं में से एक लाख नये नेतृत्व का दायित्व 10 लाख लोगों को जय जगत 2020 अभियान से जोड़ना होगा ।

2.    स्वावलंबन का विकास
-    संगठन द्वारा संचालित गांवों में प्रत्येक परिवार प्रतिदिन एक मुट्ठी अनाज तथा एक रूपया भावी आंदोलनों के लिए एकत्र करेंगे ।
-    प्रत्येक गांव में अनाज बैंक बनाया जायेगा ।
-    प्रत्येक गांव में जैविक तथा स्थानीय खेती को प्रमुखता दी जायेगी ।

3.    जल, जंगल और जमीन का अधिकार
-    देश में सभी आवासहीनों के भूमि अधिकार सुनिश्चित करने हेतु आवासीय भूमि अधिकार कानून लागू करने के लिए भारत सरकार पर दबाव बनाया जायेगा ।
-    वनाधिकार कानून के अंतर्गत निजी और सामुदायिक अधिकारों के लिए सघन आंदोलन किये जायेंगे ।
-    वंचितों के भूमि अधिकार सुनिश्चित करने के लिए राष्ट््रीय भूमि सुधार नीति लागू करने हेतु निर्णायक आंदोलन किया जायेगा ।

अभियान कैलेण्डर

वर्ष 2015 के प्रमुख आंदोलन
1.    30 जनवरी: भारत सरकार द्वारा प्रस्तुत भूमि आर्डिनेंस के विरोध में एक दिवसीय उपवास ।
2.    20 से 26 फरवरी: पलवल से दिल्ली पदयात्रा ताकि भारत सरकार पर 10 सूत्रीय आगरा समझौते को लागू करने, भूमि आर्डिनेंस को वापस लेने, आवासीय भूमि अधिकार कानून लागू करने, वनाधिकार कानून को लागू करने तथा राष्ट््रीय भूमि सुधार नीति घोषित करने के लिए निर्णायक दबाव बनाया जा सके ।
3.    15 से 28 मार्च: बिहार में आवासीय भूमि अधिकार लागू करने के लिए बोधगया से पटना   पदयात्रा ।

जय जगत 2020 अभियान
1.    2016: भूमि अधिकारों के लिए वैश्विक सम्मेलन ।
                विश्व के विभिन्न देशों से 50 भूमि आंदोलनों के महिला नेतृत्वों का प्रशिक्षण ।
2.    2017: चंपारण सत्याग्रह के 100 बरस के उपलक्ष्य में किसानों के अधिकारों के लिए अभियान ।
3.    2018: अहिंसात्मक अर्थव्यवस्था पर वैश्विक सम्मेलन ।
4.    2019: दिल्ली से जिनेवा जय जगत पदयात्रा ।
5.    2020: 10 लाख लोगों का निर्णायक जय जगत आंदोलन ।

एकता परिषद घोषणा-पत्र