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एकता महिला मंच

एकता परिषद की महिला इकाई को एकता महिला मंच नाम दिया गया है। जो गरीब वर्ग की आजीविका और उनके अस्तित्व के लिए प्राकृतिक संसाधनों पर उनके अधिकार दिलाने के लिए कार्य करती है। एकता परिषद एक गांधीवादी जन संगठन है, जो भारत के 13 राज्यों में फैला हुआ है, जिसमें मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, बिहार, ओडिसा, उत्तरप्रदेश, राजस्थान, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, आंध्रप्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात शामिल हैं। एकता महिला मंच की स्थापना 21 जून 2001 में शशि सेन्टर, मदुरई (तमिलनाडु) में हुई थी। एकता परिषद के इकाई के रूप में एकता महिला मंच, अहिंसक साधनों के माध्यम से महिला समानता, संप्रभुता और न्याय के अधिकारों के लिए संघर्ष कर रही है। यह उन सभी राज्यों और स्थानों पर मौजूद है जहां एकता परिषद काम कर रही है। 

इसका दृष्टिकोण है कि समानता, न्याय और अहिंसक समाज की स्थापना महिलाओं के नेतृत्व एवं उनकी भागीदारी से बने। इन्हें प्राप्त करने के लिए महिलाओं के गौरव, अधिकार और सशक्तिकरण के संघर्ष और नेतृत्व का हम समर्थन करते हैं। इससे उस समाज की स्थापना की जा सकेगी, जो मूल्यों, अहिंसा और आत्मनिर्भरता पर आधारित हो और जिससे गरीब एवं वंचित समुदाय अपने अधिकारों की रक्षा कर सके और जीवनयापन के लिए प्राकृतिक संसाधनों पर उनका नियंत्रण हो सके।
 
एकता महिला मंच के उद्देश्य: 
(1) भूमि और आजीविका के संसाधनों पर महिलाओं के समान अधिकारों को सुनिश्चित करना।
(2) महिलाओं को आर्थिक आत्मनिर्भरता दिलाने में उनकी मदद करना।
(3) समाज में महिलाओं के साथ हो रहे सभी प्रकार के उत्पीड़न के विरूद्ध संघर्ष करना।
(4) महिलाओं के हितों के लिए बने नियम, अधिनियमों की वकालत करना और उनका क्रियान्वयन सुनिश्चित करना। 
(5) समाज में महिलाओं के सामाजिक, राजनैतिक और आर्थिक सशक्तिकरण को सुनिश्चित करना।

उक्त उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए एकता महिला मंच निम्न रणनीतियाँ अपनाता है:
(1) उत्पीडि़त, दलित एवं गरीब महिलाओं एवं पुरुषों को संगठित करना और उन्हें उनके अधिकारों के बारे में शिक्षित करना। 
(2) संगठित महिलाओं और पुरुषों की ग्राम इकाइयों की स्थापना करना और उन्हें महिलाओं से संबंधित विषयों पर संवेदनशील बनाना। 
(3) ग्रामीण इकाइयों में कुल संख्या की 50 प्रतिशत महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करना।
(4) महिला आधारित अर्थव्यवस्था की संरचना और उनके आर्थिक सशक्तिकरण में सहायता के लिए पारस्परिक सहायता समूह ;डभ्ळद्ध का गठन करना। 
(5) युवतियों के समूह का निर्माण करना।
(6) महिलाओं में नेतृत्व क्षमता का विकास करना जिससे वे अहिंसक आंदोलन करके अपने अधिकार प्राप्त कर सके। 
(7) महिलाओं के मद्दों से जुड़े संगठनों, संस्थाओं का नेटवर्क बनाना।
(8) महिला अधिकारों के लिए सरकार, प्रशासन एवं मीडिया में वकालत करना।
(9) महिला अधिकारों के लिए अहिंसक संघर्ष की प्रक्रिया में वार्तालाप, संघर्ष एवं रचनात्मक गतिविधियां सुनिश्चित करना।

एकता महिला मंच की शक्तियां और पहुंच 
- एकता महिला मंच भारत के 13 राज्यों में फैला हुआ है।
- इसमें लगभग 65,000 महिलाओं की सदस्यता है। 
- एकता महिला मंच ने देश में अब तक एक हजार से अधिक पारस्परिक सहायता समूह (एम.जी.एस.) का निर्माण किया है, जिसके द्वारा संबंधित परिवारों की आजीविका को मजबूती देने के लिए आर्थिक गतिविधियां संचालित की जाती है। 
- महिला समूह अपनी आजीविका निर्वाह के लिए लगभग दस हजार (10,000) एकड़ सरकारी जमीन पर लंबे समय से कब्जा कर खेती कर रहे हंै। अब अनुसूचित जनजाति और अन्य परम्परागत वनवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम, 2006 के अंतर्गत इन जमीनों के कानूनी अधिकार पाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। 
- महिला समूह विभिन्न सरकारी परियोजना के तहत विस्थापितों के लिए कुछ नये गांवों की स्थापना करने में सफल रहा है। 
- सैकड़ों महिलाओं ने अपने अधिकारों के लिए अहिंसक संघर्षों में अपने नेतृत्व कौशल का प्रदर्शन किया है। 
- इस गांधीवादी संघर्ष की प्रक्रिया से उभरते महिला नेतृत्व ने राजनैतिक प्रक्रियाओं में और देश की विभिन्न लोकतांत्रिक संस्थाओं में नेतृत्व प्रदान किया है। 

हमारा नारा 
- हम दुनिया की आधी आबादी है, हमें देश की आधी जमीन मिलना चाहिए।
- भूख के खिलाफ लड़ाई में, हम एक साथ है।
- यह हमारा संघर्ष है, यह हमारा नेतृत्व है।
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