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एकता कला मंच

कला इकाई के रूप में एकता कला मंच एकता परिषद के प्रदर्शनात्मक कलाओं का निकाय है। यह गुनगुनाते हुए दिल एवं रचनात्मक भाव की तरह है। कला मंच न केवल एकता परिषद की यात्राओं में भाग लेता है, बल्कि यह देश भर के छोटे-छोटे गांवों में नाटकों का प्रदर्शन भी आयोजित करता है। एकता परिषद के संघर्ष को समझने के लिए नाटक, गीत एवं नृत्य अनपढ़ दर्शकों यानी कार्यकर्ताओं के लिए एक महत्वपूर्ण उपकरण हैं। इसके माध्यम से अन्य स्थानों पर घटित सच्ची कहानियों को प्रदर्शित किया जाता है। उदाहरण के लिए - यह किसी गांव में ग्रामीणों द्वारा बरसों से संभाली गई काबिज जमीन को जमींदारों से छुड़ाने की घटना हो सकती है। इसी तरह दर्शक अन्य गांवों की समस्याओं के बारे में जान पाते हैं और यह समझते हैं कि वे भी इस प्रकार समस्याओं का सामना कर सकते हैं। इसके बाद वे एकता परिषद के सामने अपने मुद्दों के बारे में बताते हैं और आंदोलन के महत्वपूर्ण कार्यकर्ता के रूप में आंदोलन का हिस्सा बन जाते हैं।

एकता कला मंच का विकास
कला मंच की शुरुआत सी.इ.एस.सी.आइ. सेंटर में रंगमंच कार्यशाला महोत्सव 1998 से हुई। पहले ’मेला मंच‘ में एकता परिषद के कार्यकर्ता और भारत भर के कलाकार ’एक समान मुद्दे की खोज‘ के लिए एकत्रित हुए। उसके बाद एकता कला मंच के कार्यकर्ताओं ने अपने प्रदर्शन की क्षमता का निर्माण और अपनी रचनात्मकता में सुधार किया। कला मंच के कार्यकर्ताओं ने 2006 के ’चेतावनी मार्च‘ में और ’जनादेश 2007‘ के दौरान महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पैदल मार्च के साथ उनके अभिनय ने यात्रियों को प्रोत्साहित किया। वे हर दिन लोगों को अपने अधिकारों की मांग के लिए की जा रही दुखदायी यात्रा को सफल बनाने के लिए दृढ़संकल्पित करते हुए दिल्ली की ओर कूच किए हुए यात्रियों को आनंदित करते रहे।

एकता कला मंच का वर्तमान स्वरूप
जनादेश 2007 के बाद एकता परिषद का अत्यधिक विस्तार हुआ। जनादेश से उत्पन्न मांग एवं अपेक्षाओं की पूर्ति के लिए हर एक कार्यकर्ता को पहले से अधिक कार्य करने की आवश्यकता थी। इसलिए कला मंच का हर कलाकार पुनः एकता परिषद के कार्यकर्ता बनकर परिषद के कार्यों के लिए वापस आ गए, जहां उन्होंने गरीबों, भूमिहीनों के लिए आजीविका के संसाधनों के लिए मैदानी संघर्ष में अपना स्थान लिया। यद्यपि साथ-साथ वे रचनात्मक कार्य को भी आगे बढ़ाते रहे। अब हम हाल ही में बनी सीडी में कला मंच को सुन सकते हैं, इसे जल्द ही रेडियो पर प्रसारित किया जाने वाला है।

कला मंच एवं जन सत्याग्रह 2012
अब कला मंच 2012 की ओर अग्रसर है, जब वे फिर सड़कों पर नाटक, नृत्य और गीत का प्रदर्शन करेंगे। कार्यकर्ताओं ने पुनः प्रशिक्षण, कार्यशालाओं का निर्माण, प्रतियोगिता, त्यौहारों एवं मेलों में प्रदर्शन शुरू कर दिया है, ताकि नए सदस्यों की पहचान कर उन्हें अभिप्रेरित किया जा सके। वे भविष्य में अपनी रचनात्मकता को एक दृष्टिकोण देते हुए कला मंच को 2012 के लिए तैयार करेंगे और पैदल यात्रा में यात्रियों को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेंगे। निःसंदेह हमें इनकी ज्यादा जरूरत होगी।
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